GK Quiz In Hindi: रामायण में रावण को बहुत बड़ा विद्वान, महाबली और घमंडी राजा बताया गया है। उसने देवताओं को भी चुनौती दी थी और कई वरदान पा रखे थे। फिर भी उसके मन में डर था। यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी रावण किस भगवान से सबसे ज़्यादा डरता था। नीचे इस विषय को आसान भाषा और बड़े, विस्तृत संदर्भ के साथ समझाया गया है।
प्रश्न 1. रावण कौन था?
Answer: रावण लंका का राजा था और बहुत बड़ा विद्वान माना जाता था। वह वेदों का ज्ञाता था और उसके पास अपार शक्ति थी, लेकिन उसके अंदर अहंकार भी बहुत ज़्यादा था।
प्रश्न 2. रावण को शक्ति कहाँ से मिली थी?
Answer: रावण ने कठोर तपस्या करके कई देवताओं से वरदान पाए थे। इन्हीं वरदानों के कारण वह खुद को अजेय मानने लगा था।
प्रश्न 3. क्या रावण भगवान शिव का भक्त था?
Answer: हाँ, रावण भगवान शिव का बड़ा भक्त था। उसने शिव को प्रसन्न करने के लिए बहुत कठिन तप किया था और इसी कारण उसे कई शक्तियाँ मिली थीं।
प्रश्न 4. क्या रावण भगवान शिव से डरता था?
Answer: नहीं, रावण भगवान शिव से डरता नहीं था, बल्कि उनका बहुत सम्मान करता था। शिव उसके आराध्य देव थे, इसलिए डर की बजाय भक्ति का भाव था।
प्रश्न 5. रावण को अपने वरदान पर क्यों घमंड था?
Answer: रावण को यह वरदान मिला था कि देवता, दानव और राक्षस उसे मार नहीं सकते। इसी कारण वह खुद को सबसे शक्तिशाली समझने लगा और किसी से नहीं डरता था।
प्रश्न 6. फिर रावण के मन में डर कैसे पैदा हुआ?
Answer: जब एक वानर ने अकेले लंका में घुसकर पूरे नगर को हिला दिया, अशोक वाटिका उजाड़ दी और लंका जला दी, तब रावण को पहली बार अपने अंत का एहसास हुआ।
प्रश्न 7. वह वानर कौन था?
Answer: वह वानर भगवान हनुमान थे, जो भगवान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं।
प्रश्न 8. रावण किस भगवान से सबसे ज़्यादा डरता था?
Answer: रावण सबसे ज़्यादा भगवान हनुमान से डरता था। कारण यह था कि हनुमान ने अकेले ही उसकी पूरी लंका को हिला दिया था और रावण को यह समझ आ गया था कि जिस राम के दूत में इतनी शक्ति है, स्वयं राम कितने शक्तिशाली होंगे।
प्रश्न 9. हनुमान से डर का रावण पर क्या असर पड़ा?
Answer: हनुमान से डर के कारण रावण अंदर से अस्थिर हो गया था। उसे पहली बार यह महसूस हुआ कि उसके वरदान उसे बचा नहीं पाएँगे और उसका अंत निश्चित है।
प्रश्न 10. इस सवाल से हमें क्या सीख मिलती है?
Answer: यह सवाल हमें सिखाता है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्ची भक्ति और धर्म के सामने वह टिक नहीं पाता। शक्ति से ज़्यादा महत्वपूर्ण सही मार्ग पर होना होता है।
Disclaimer: यह आर्टिकल रामायण, धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग कथाओं और परंपराओं में विवरणों में थोड़ा अंतर हो सकता है। यहां दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य ज्ञान बढ़ाना है, न कि किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना।